ई-मधेश न्युज
नया संघर्षक तैयारी (कविता)
कविता
नया संघर्षक तैयारी
बेथरी नरसंघार
आ मलेठ दमनक बाद
जेना हवा बहनाइ रूकि गेल होइ
जेना पत्ता हिलनाइ चूकि भेल होइ
जेना घड़ीक सूइया ठमकि गेल होइ
जेना धड़कन धड़कनाइ बिसरि गेल होइ
बाटघाटपर मसानघाटक शान्ति छै
चौकचौराहापर स्वघोषित चुप्पी छै
फेर गुजगुज अन्हरिया पसरि रहल छै
समयक पहिया पाछा ससरि रहल छै
मुदा जखन हम जाइछी घरेघर
आ हुलकै छी आँगने आँगन
तखन देखैत छी
माएसभ, दादीसभ
काकीसभ आ भौजीसभ
गाबि रहल छथिन्ह सम्वेत स्वरमे
’कुम्हराक चाक सन, धोबियाक पाट सन’
आ पिया रहल छथिन्ह तेल आ उप्टन
नवजात शिशुक जाँघ, छाती आ माथमे
आ तैयार क’ रहल छथिन्ह ओहि शिशुसभके
जे काल्हि निकलतै जुलुस बनिक’
सड़क, चौक चौराहा आ राजमार्गपर
आ खड़ा भ जेतै छाति तानिक’
घौंछ सत्ताक आगा ।
अमरेन्द्र यादव,
दिघवा, राजविराज–१०