ई-मधेश न्युज
रामनवमी पर विशेष- राम : भारतीय सभ्यता के मूल आधार
विनोदकुमार विमल,
राम का जीवन केवल एक ऐतिहासिक आख्यान नहीं, बल्कि मानवता के लिए शाश्वत आचार-संहिता है । उनके व्यक्तित्व में त्याग, समरसता और अटूट कर्तव्यनिष्ठा का जो अद्वितीय संगम दिखाई देता है, वह विश्व इतिहास में विरल है
“राम नीति हैं, राम निरन्तरता हैं
राम व्यापक हैं , राम विश्वात्मा हैं
राम भारत के आधार हैं, राम भारत के विचार हैं
राम आग नहीं, राम ऊर्जा हैं
राम सिर्फ हमारे नहीं, बल्कि राम सबका है
राम विवाद नहीं, राम समाधान हैं
राम वर्तमान नहीं, राम अनन्तकाल हैं “
— नरेन्द्र मोदी
राम की महत्ता भारतीय संस्कृति, धर्म और दर्शन में अत्यंत व्यापक और गहरी है । उन्हें केवल एक राजा या देवता के रूप में नहीं, बल्कि एक आदर्श मानव के रूप में देखा जाता है । राम को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है मर्यादाओं का पालन करने वाला सर्वश्रेष्ठ पुरुष । उन्होंने जीवन में धर्म, सत्य और मर्यादाओं का कभी उल्लंघन नहीं किया । राम ने हमेशा बुराई पर अच्छाई की विजय का मार्ग दिखाया है । रावण का वध करके उन्होंने समाज में धर्म की स्थापना की, जो यह संदेश देता है कि अंत में जीत हमेशा सत्य की होती है । रामकथा भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रेम और नैतिकता का प्रतीक बनी हुई है । राम का जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और नैतिकता के मार्ग पर कैसे अडिग रहा जाए । वे शाश्वत आदर्श हैं ।
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`राम` शब्द संस्कृत के `रम` और `धम` से मिलकर बना है, `रम` का अर्थ है – `रमना` या `समा जाना` और `धम` का अर्थ है – `ब्रह्माण्ड का खाली स्थान` l इस तरह राम का अर्थ है – सफल ब्रह्माण्ड में निहित या रमा हुआ तत्व यानी चराचर में विराजमान स्वयं ब्रह्मा l राम को ` रमण`, `रामर` और `रामचन्द्र` के नाम से भी जाना जाता है l राम भारतीय संस्कृति, धर्म और नैतिकता के सर्वोच्च प्रतीक हैं । राम भारत के प्राण है, राम का चरित्र भारतीय संस्कृति की आत्मा है l बिना राम के चरित्र के भारत निष्प्राण है l भारतीय जनमानस के रोम – रोम में राम बसे हुए हैं l
शास्त्रों के अनुसार बलशालियों में सर्वाधिक बलशाली राम हैं, लेकिन राम से भी बढ़कर राम का नाम है । असंख्य संत-महात्माओं ने राम का नाम जपते – जपते मोक्ष पा लिया । राम भक्त हनुमान, लक्ष्मण, सुग्रीव, से लेकर कबीर, तुलसी और गांधीजी तक सभी राम का नाम ही जपते रहे हैं, यही नहीं रावण ने भी अपने अंतिम समय में राम का नाम पुकारकर अपना लोक-परलोक सुधारा । राम नाम की महिमा के प्रभाव से पत्थर भी तैरने लगते हैं । राम का नाम एक चमत्कार से कम नहीं है, इसके स्मरण मात्र से ही सारे कार्य सिद्घ हो जाते हैं । जीवन से मरण तक मनुष्य के साथ सदा चलता है राम का नाम । राम नाम के स्मरण से डाकू वाल्मीकि संत वाल्मीकि बन गए जिन्होंने रामायण जैसे महाकाव्य की रचना की तो पत्नी के प्रेम मोह में फंसे तुलसी, तुलसीदास बन गए, जिन्होने रामचरितमानस की रचना की । महात्मा गांधी के रघुपति राघव राजा राम ने उनको विश्व भर में ख्याति दी । राम भारतीय जन मानस के अन्तर्मन में प्रवाहित संस्कृति की अविरल धारा हैं, जो युगों – युगों से बह रही है और बहती रहेगी ।
राम की महत्ता केवल एक राजा या ईश्वर के अवतार के रूप में नहीं, बल्कि एक आदर्श मनुष्य के रूप में भी है । राम का जीवन नैतिकता का प्रतीक है । उन्होंने राजा, पुत्र, भाई और पति के रूप में हर भूमिका का पूरी ईमानदारी से पालन किया । उन्होंने पिता के वचन को पूरा करने के लिए 14 वर्ष का वनवास खुशी – खुशी स्वीकार किया । वे धर्म, सत्य और मर्यादा के रक्षक माने जाते हैं । राम ने समाज के हर वर्ग को सम्मान दिया, चाहे वह केवट हो, शबरी हो या वानर सेना । उन्होंने सभी को गले लगाकर सामाजिक एकता का संदेश दिया ।
राम केवल एक ऐतिहासिक पात्र या पौराणिक देवता नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय सभ्यता के मूल आधार, मर्यादा और आदर्शों के प्रतीक हैं । राम का जीवन, जिसे वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में वर्णित किया गया है, मानव जीवन के लिए एक आदर्श है । हजारों वर्षों से राम भारतीय जनमानस में रचे – बसे हैं, जो उन्हें एक जीवंत परंपरा या सभ्यता के रूप में स्थापित करते हैं । राम केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी कथाओं और आदर्शों की स्वीकार्यता विभिन्न देशों की संस्कृतियों और साहित्य में भी मिलती है । राम विपरीत परिस्थितियों में भी मर्यादा, कर्तव्य और नीति का पालन करने का संदेश देते हैं । इसलिए उन्हें एक ऐसा युगातीत तत्व माना जाता है जो न केवल इतिहास बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी महत्त्वपूर्ण हैं ।
राम की जीवन कथा प्रतीकों से ओतप्रोत है । शेल्डन पोलॉक के अनुसार,“ भारतीय ग्रंथों में वर्णित राम का जीवन एक उत्कृष्ट कृति है जो दुनिया और जीवन की प्रकृति को प्रस्तुत करने, अवधारणात्मक रूप देने और समझने के लिए एक ढांचा प्रदान करती है l“ विश्वभर के प्रमुख महाकाव्यों और धार्मिक कथाओं की तरह यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह संस्कृति को उसकी वास्तविकता से परिचित कराता है । राम का जीवन अच्छाई और बुराई के बीच संघर्ष के पश्चिमी आदर्श से कहीं अधिक जटिल है, जहाँ अमर शक्तिशाली देवताओं या नायकों और नश्वर संघर्षरत मनुष्यों के बीच स्पष्ट अंतर होता है । भारतीय परंपराओं में, विशेष रूप से राम कहानी एक दिव्य मानव, एक नश्वर देवता के बारे में है, जो दोनों को उस आदर्श में समाहित करता है जो मनुष्यों और देवताओं दोनों से परे है ।
राम मात्र एक शब्द नहीं, यह अपने आप में एक सभ्यता का प्रमाण है l राम सत्य हैं,राम ही आस्था हैं l राम विराट भारतीय संस्कृति के आदर्श हैं l राम संस्कृति का अर्थ है – भारतीय संस्मृति, मानवीय संस्कृति और विश्व संस्कृति l राम का आदर्श जीवन भारतीय संस्कृति का एक ऐसा दिव्य प्रभामंडल है, जो समस्त भारत और विश्व को सदैव आलोकित करता रहेगा l अतः राम मात्र भारतीय संस्कृति के प्राण पुरुष ही नहीं, वरन् वे विश्व संस्कृति के नायक हैं l विश्व जनमानस ने उन्हें आदर्श पुरुष के रूप में स्वीकार किया है l
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि आज भारत ही नहीं, अपितु पूरी दुनिया में राम की चर्चा उनके भक्तों और सनातन संस्कृति को मानने वालों में जहाँ हर्ष और उत्साह के रूप में व्याप्त है, वहीं मीडिया जगत से लेकर समाज के विभिन्न हिस्सों में राजनैतिक क्षेत्र तथा विभिन्न धर्म पंथ सम्प्रदाय को मानने वाले सभी में राम की चर्चा है । आस्था के रूप में या अनास्था के रूप में लेकिन चर्चा राम की ही है । एक तरह से यही राम की व्यापकता है, यही अखंड अनादि रूप है, जो सब में व्याप्त है । राम अखिल ब्रह्माण्ड की नायक सत्ता हैं, राम जीवन शैली हैं, राम आर्दश व्यवस्था हैं, राम आर्दश राजा, राम आस्था प्रेम और भक्ति हैं । राम सहजता, सरलता हैं । राम समरस, भेदभाव रहित, न्यायपूर्ण, पक्षपात रहित समाज की रचना हैं । राम का गुणगान आदि और अनंत है । राम भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं l राम को धर्म, जाति, देश और काल तक सीमित नहीं किया जा सकता । राम दुनिया की महाशक्ति हैं । जीवन की प्रत्येक समस्या के निवारण का रहस्य राम नाम में निहित है । यह लेख मुख्यतः उस विषय पर आधारित है जिसे मैं स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाता हूँ । यह जनकपुर के धार्मिक पर्यटन विशेषज्ञ सुदर्शन लाल कर्ण के साथ हुई बातचीत पर भी आधारित है ।