ई-मधेश न्युज
अर्धचेत नारी
कविता
एकटा नारी दशगजा पं' ठाढ भ
दैखैय दक्षिण भर, कखनो उत्तर भर
दक्षिण. देखैय उज्जर धबधब
एकदम सुन्दर सन ।
उत्तर देखैय त
करिया करछौह
करिया मेघ सन ।
शासक एनिओं
शासक ओनिओं
जनता एनिओं
जनता ओनिओ
नारी एनिओं
नारी ओनिओं
लेकिन,
कियाक नहि अधिकार बराबर ?
ओ आस लगबैय
विकासक पूर्वाधारके
लोक बुभैय्, एहने ओहने
जेकर सोच रहे तेहने ।
करैय शासनके तुलना
करैय' जनताके तुलना
करैय' समाजके तुलना
पावैय' बड़जोर फरक
जेकर समानता होनाइ
बडभारी बात थिक ।
आउर कते बनत ?
शहीदक लम्बा सूची
ई. सोचि ऊ
अर्धचेत भ' जाइय' ।।
अरविन्द कुमार यादव
सभापाल मैथिली साहित्यकार सभा
कमला नपा–८, हरिने