ई-मधेश न्युज
वो चाँद छल
वो चाँद छल
वो चाँद छल हमर,
हम छलौं हुन्कर चकोर,
एक दोसरके देखैत दिन बितैछल,
होअत छल भोर....।। वो चाँद छल हमर.......
बैठल छलौ हम एक दोसरके
सामने, करै छलौ मनक बात,
बीतल वो बात याद आवैय
करैय हमर दिलके झक्कोर.....।।
वो चाँद छल हमर.....२
वो कहै छल, अहाँ छी मृगनयनी,
मन करैय अहाँके ऑइखक
सागरमे गोता लगाबी,
मिठगर हुन्कर बातसँ हम
भ जाय छलौ विभोर......।।
वो चाँद छल हमर......२
कि दुनियाके याह रीत छी,
हम रहि एक दोसर से अलग
स्वार्थी ई संसारमे, पागल बैन
करैछी शोर.....।।
वो चाँद छल हमर २!!!
एन्जल निलु मिना साह
राजविराज–७